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    मैं अंजान मुसाफ़िर, अजनबियों सा दीखता हूँ। हर इकट्ठी भीड़ में भी मैं, कवियों सा दिखता हूँ। हूँ चमन की धूल, पर, मंडियों में बिकता हूँ। ...